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ramayan 1.55.26: ऐसा कहकर जप करने वालों में श्रेष्ठ, परम तेजस्वी वसिष्ठजी ने उस समय विश्वामित्र से क्रोधित होकर कहा -   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.55.26 
एवमुक्त्वा महातेजा वसिष्ठो जपतां वर:।
विश्वामित्रं तदा वाक्यं सरोषमिदमब्रवीत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर जप करने वालों में श्रेष्ठ, परम तेजस्वी वसिष्ठजी ने उस समय विश्वामित्र से क्रोधित होकर कहा -
 
Having said this, the most illustrious Vasishtha, the best amongst those who chant, said angrily to Vishwamitra at that time -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)