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ramayan 1.55.25: वसिष्ठजी ने बार-बार कहा, 'डरो मत, मैं इस गाधिपुत्र को अभी नष्ट कर दूँगा, जैसे सूर्य कोहरे को दूर कर देता है।'॥25॥   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.55.25 
वदतो वै वसिष्ठस्य मा भैरिति मुहुर्मुहु:।
नाशयाम्यद्य गाधेयं नीहारमिव भास्कर:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वसिष्ठजी ने बार-बार कहा, 'डरो मत, मैं इस गाधिपुत्र को अभी नष्ट कर दूँगा, जैसे सूर्य कोहरे को दूर कर देता है।'॥25॥
 
Vasishtha repeatedly said, 'Don't be afraid, I will destroy this son of Gadhi right now, just like the sun dispels fog.'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)