Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.55.24: महात्मा वसिष्ठ का वह आश्रम वीरान हो गया। दो ही घण्टों में वह स्थान बंजर भूमि के समान शान्त हो गया॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.55.24 
वसिष्ठस्याश्रमपदं शून्यमासीन्महात्मन:।
मुहूर्तमिव नि:शब्दमासीदीरिणसंनिभम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महात्मा वसिष्ठ का वह आश्रम वीरान हो गया। दो ही घण्टों में वह स्थान बंजर भूमि के समान शान्त हो गया॥ 24॥
 
‘That hermitage of Mahatma Vasishtha became deserted. In just two hours, the place became as quiet as a barren land.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)