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ramayan 1.55.22: बुद्धिमान विश्वामित्र के अस्त्र की बढ़ती हुई चमक देखकर वहाँ रहने वाले सैकड़ों ऋषिगण भयभीत हो गए और सभी दिशाओं में भाग गए।   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.55.22 
उदीर्यमाणमस्त्रं तद् विश्वामित्रस्य धीमत:।
दृष्ट्वा विप्रद्रुता भीता मुनय: शतशो दिश:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान विश्वामित्र के अस्त्र की बढ़ती हुई चमक देखकर वहाँ रहने वाले सैकड़ों ऋषिगण भयभीत हो गए और सभी दिशाओं में भाग गए।
 
Seeing the increasing brilliance of the weapon of the wise Visvamitra, hundreds of sages residing there became frightened and fled in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)