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ramayan 1.55.21: फिर वे भगवान विश्वामित्र वशिष्ठ के आश्रम में जाकर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाने लगे, जिनके प्रकाश से सारा तपोवन जलने लगा॥21॥   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.55.21 
ततो गत्वाऽऽश्रमपदं मुमोचास्त्राणि पार्थिव:।
यैस्तत् तपोवनं नाम निर्दग्धं चास्त्रतेजसा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
फिर वे भगवान विश्वामित्र वशिष्ठ के आश्रम में जाकर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाने लगे, जिनके प्रकाश से सारा तपोवन जलने लगा॥21॥
 
Then he went to the ashram of Lord Vishwamitra Vashishtha and started using different types of weapons. Due to whose light the entire Tapovan started burning. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)