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ramayan 1.55.14: "राजन! आप तपस्या क्यों करते हैं? कहिए, आप क्या कहना चाहते हैं? मैं आपको वर देने आया हूँ। आप जो वर चाहते हैं, बताइए।" ॥14॥   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.55.14 
किमर्थं तप्यसे राजन् ब्रूहि यत् ते विवक्षितम्।
वरदोऽस्मि वरो यस्ते कांक्षित: सोऽभिधीयताम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
"राजन! आप तपस्या क्यों करते हैं? कहिए, आप क्या कहना चाहते हैं? मैं आपको वर देने आया हूँ। आप जो वर चाहते हैं, बताइए।" ॥14॥
 
"King! Why do you perform penance? Tell me what do you want to say? I have come to grant you a boon. Tell me whatever boon you want." ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)