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ramayan 1.55.13: 'कुछ काल के पश्चात् वर देने वाले भगवान वृषभध्वज (शिव) ने महामुनि विश्वामित्र को दर्शन देकर कहा- 13॥   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.55.13 
केनचित् त्वथ कालेन देवेशो वृषभध्वज:।
दर्शयामास वरदो विश्वामित्रं महामुनिम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'कुछ काल के पश्चात् वर देने वाले भगवान वृषभध्वज (शिव) ने महामुनि विश्वामित्र को दर्शन देकर कहा- 13॥
 
'After some time, Lord Vrishabhadhwaj (Shiva), the giver of blessings, appeared to Mahamuni Vishwamitra and said - 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)