Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.55.12: 'हिमालय की ओर, जो कि नपुंसकों और सर्पों से भरा हुआ था, जाकर उसने महादेवजी की प्रसन्नता के लिए महान तप का आश्रय लिया और तपस्या में लग गया ॥12॥ | ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स गत्वा हिमवत्पार्श्वे किंनरोरगसेवितम्।
महादेवप्रसादार्थं तपस्तेपे महातपा:॥ १२॥
अनुवाद
'हिमालय की ओर, जो कि नपुंसकों और सर्पों से भरा हुआ था, जाकर उसने महादेवजी की प्रसन्नता के लिए महान तप का आश्रय लिया और तपस्या में लग गया ॥12॥
'Going to the side of the Himalayas, a region infested with eunuchs and serpents, he took refuge in great penance for the pleasure of Mahadevji and engaged himself in penance. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥