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ramayan 1.55.11: 'उसका एक ही पुत्र शेष रह गया था, उसे उसने राजा पद पर अभिषिक्त करके राज्य की रक्षा का दायित्व सौंपा और क्षत्रिय धर्म के अनुसार पृथ्वी का पालन करने का आदेश देकर स्वयं वन में चला गया॥11॥   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.55.11 
स पुत्रमेकं राज्याय पालयेति नियुज्य च।
पृथिवीं क्षत्रधर्मेण वनमेवाभ्यपद्यत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'उसका एक ही पुत्र शेष रह गया था, उसे उसने राजा पद पर अभिषिक्त करके राज्य की रक्षा का दायित्व सौंपा और क्षत्रिय धर्म के अनुसार पृथ्वी का पालन करने का आदेश देकर स्वयं वन में चला गया॥11॥
 
'He had only one son left, he anointed him as the king and assigned him to protect the kingdom and after ordering him to look after the earth according to the Kshatriya religion, he went into the forest. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)