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ramayan 1.55.10: पुत्र और सेना दोनों के मारे जाने पर वह कटे हुए पंखवाले पक्षी के समान असहाय हो गया। उसका सारा बल और उत्साह नष्ट हो गया। वह मन में अत्यन्त दुःखी हो गया॥10॥   |   ramayan सर्ग 1.55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.55.10 
हतपुत्रबलो दीनो लूनपक्ष इव द्विज:।
हतसर्वबलोत्साहो निर्वेदं समपद्यत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पुत्र और सेना दोनों के मारे जाने पर वह कटे हुए पंखवाले पक्षी के समान असहाय हो गया। उसका सारा बल और उत्साह नष्ट हो गया। वह मन में अत्यन्त दुःखी हो गया॥10॥
 
‘With the death of both his son and his army, he became as helpless as a bird with clipped wings. All his strength and enthusiasm vanished. He became very sad in his heart.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)