श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 54: विश्वामित्र का वसिष्ठजी की गौ को बलपूर्वक ले जाना, गौ का दुःखी होकर वसिष्ठजी से इसका कारण पूछना, विश्वामित्रजी की सेना का संहार करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.54.9 
एवमुक्तस्तु ब्रह्मर्षिरिदं वचनमब्रवीत्।
शोकसंतप्तहृदयां स्वसारमिव दु:खिताम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसके ऐसा कहने पर वसिष्ठ ऋषि शोक से भरे हुए हृदय वाली बहन के समान उस गौ से बोले-॥9॥
 
Upon her saying this, the sage Vasishtha spoke to the cow as if she were a sister with a heart filled with grief -॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)