श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 54: विश्वामित्र का वसिष्ठजी की गौ को बलपूर्वक ले जाना, गौ का दुःखी होकर वसिष्ठजी से इसका कारण पूछना, विश्वामित्रजी की सेना का संहार करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.54.4 
किं मयापकृतं तस्य महर्षेर्भावितात्मन:।
यन्मामनागसं दृष्ट्वा भक्तां त्यजति धार्मिक:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे शुद्ध हृदय वाले महामुनि! मैंने ऐसा कौन-सा अपराध किया है कि वे पुण्यात्मा मुनि मुझे निर्दोष और अपना भक्त जानकर भी त्याग रहे हैं?॥4॥
 
‘O great sage with pure heart, what crime have I committed that that virtuous sage is abandoning me even after knowing me to be innocent and his devotee?’॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)