श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 54: विश्वामित्र का वसिष्ठजी की गौ को बलपूर्वक ले जाना, गौ का दुःखी होकर वसिष्ठजी से इसका कारण पूछना, विश्वामित्रजी की सेना का संहार करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.54.15 
अप्रमेयं बलं तुभ्यं न त्वया बलवत्तर:।
विश्वामित्रो महावीर्यस्तेजस्तव दुरासदम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
"आपका बल अपरिमित है। महाबली विश्वामित्र भी आपसे अधिक शक्तिशाली नहीं हैं। आपका तेज अदम्य है।
 
"Your strength is immeasurable. The mighty Vishwamitra is not more powerful than you. Your brilliance is indomitable.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)