श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.53.4 
नानास्वादुरसानां च खाण्डवानां तथैव च।
भोजनानि सुपूर्णानि गौडानि च सहस्रश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘नाना प्रकार के स्वादिष्ट रस, खाण्डव तथा नाना प्रकार के भोजन से भरे हुए हजारों चाँदी के थाल सजाये गये थे।
 
‘Thousands of silver plates filled with various kinds of delicious juices, Khandava and various kinds of food were decorated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)