vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 1: बाल काण्ड
»
सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना
»
श्लोक 4
श्लोक
1.53.4
नानास्वादुरसानां च खाण्डवानां तथैव च।
भोजनानि सुपूर्णानि गौडानि च सहस्रश:॥ ४॥
अनुवाद
‘नाना प्रकार के स्वादिष्ट रस, खाण्डव तथा नाना प्रकार के भोजन से भरे हुए हजारों चाँदी के थाल सजाये गये थे।
‘Thousands of silver plates filled with various kinds of delicious juices, Khandava and various kinds of food were decorated.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×