श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.53.3 
उष्णाढॺस्यौदनस्यात्र राशय: पर्वतोपमा:।
मृष्टान्यन्नानि सूपांश्च दधिकुल्यास्तथैव च॥ ३॥
 
 
अनुवाद
गरमागरम चावल के ढेर पहाड़ की तरह लग गए। खीर और दाल भी बनाई गई। दूध, दही और घी की नदियाँ बह रही थीं।
 
‘Heaps of hot rice were piled up like mountains. Sweets (kheer) and dal were also prepared. Rivers of milk, curd and ghee flowed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)