श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 18-20
 
 
श्लोक  1.53.18-20 
हैरण्यानां रथानां च श्वेताश्वानां चतुर्युजाम्॥ १८॥
ददामि ते शतान्यष्टौ किंकिणीकविभूषितान्।
हयानां देशजातानां कुलजानां महौजसाम्।
सहस्रमेकं दश च ददामि तव सुव्रत॥ १९॥
नानावर्णविभक्तानां वय:स्थानां तथैव च।
ददाम्येकां गवां कोटिं शबला दीयतां मम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रतों का पालन करने वाले ऋषिवर! इनके अतिरिक्त मैं आपको आठ सौ स्वर्ण रथ दूँगा, जिनमें सुशोभित करने के लिए स्वर्ण घंटियाँ होंगी और प्रत्येक रथ में चार श्वेत घोड़े होंगे। मैं आपको उत्तम देश में उत्पन्न उत्तम नस्ल और महाबलशाली ग्यारह हजार घोड़े भी अर्पित करूँगा। इतना ही नहीं, मैं आपको विविध रंगों वाली एक करोड़ नवीन गौएँ भी दूँगा, किन्तु आप कृपा करके मुझे यह शबला गाय दे दीजिए।
 
'O sage who observes the best vows! Besides these, I will give you eight hundred golden chariots, which will have golden bells for decoration and each chariot will have four white horses. I will also offer eleven thousand horses of good breed and great power born in the best country to you. Not only this, I will also give you one crore new cows of various colors, but please give me this Shabla cow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)