श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  1.53.16-17h 
वसिष्ठेनैवमुक्तस्तु विश्वामित्रोऽब्रवीत् तदा॥ १६॥
संरब्धतरमत्यर्थं वाक्यं वाक्यविशारद:।
 
 
अनुवाद
वसिष्ठजी के ऐसा कहने पर बोलने में कुशल विश्वामित्र क्रोधित होकर इस प्रकार बोले -॥16 1/2॥
 
Upon Vasishtha saying this, Visvamitra, who was skilled in speaking, spoke angrily as follows -॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)