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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना
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श्लोक 1
श्लोक
1.53.1
एवमुक्ता वसिष्ठेन शबला शत्रुसूदन।
विदधे कामधुक् कामान् यस्य यस्येप्सितं यथा॥ १॥
अनुवाद
'शत्रुसूदन! महर्षि वसिष्ठ के ऐसा कहने पर उस चित्तीदार कामधेनु ने प्रत्येक मनुष्य को उसकी इच्छानुसार सामग्री प्रदान की॥1॥
'Shatrusudan! Upon Maharishi Vasishtha saying this, that spotted Kamadhenu provided the material for each person as per his desire.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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