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ramayan 1.52.15: 'वसिष्ठजी के ऐसा कहने पर बुद्धिमान राजा विश्वामित्र बोले - 'मुने ! आपके आतिथ्यपूर्ण वचनों के कारण ही मेरा पूर्ण स्वागत हुआ ॥15॥   |   ramayan सर्ग 1.52: महर्षि वसिष्ठ द्वारा विश्वामित्र का सत्कार और कामधेनु को अभीष्ट वस्तुओं की सृष्टि करने का आदेश   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 52: महर्षि वसिष्ठ द्वारा विश्वामित्र का सत्कार और कामधेनु को अभीष्ट वस्तुओं की सृष्टि करने का आदेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.52.15 
एवमुक्तो वसिष्ठेन विश्वामित्रो महामति:।
कृतमित्यब्रवीद् राजा पूजावाक्येन मे त्वया॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'वसिष्ठजी के ऐसा कहने पर बुद्धिमान राजा विश्वामित्र बोले - 'मुने ! आपके आतिथ्यपूर्ण वचनों के कारण ही मेरा पूर्ण स्वागत हुआ ॥15॥
 
'On Vasishtha saying this, the wise king Vishwamitra said - 'Mune! It was only because of your hospitable words that I felt completely welcomed. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)