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ramayan 1.51.9: ‘विश्वामित्रजी! क्या यहाँ आकर मेरे माता-पिता द्वारा सम्मानित श्री रामजी ने मेरे पूज्य पिता को शान्त मन से नमस्कार किया?’ 9॥   |   ramayan सर्ग 1.51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.51.9 
अपि शान्तेन मनसा गुरुर्मे कुशिकात्मज।
इहागतेन रामेण पूजितेनाभिवादित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘विश्वामित्रजी! क्या यहाँ आकर मेरे माता-पिता द्वारा सम्मानित श्री रामजी ने मेरे पूज्य पिता को शान्त मन से नमस्कार किया?’ 9॥
 
‘Vishwamitraji! Did Shri Ram, who was honored by my parents after coming here, greet my revered father with a calm mind?' 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)