Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.51.17: ये विश्वामित्र पहले धर्मात्मा राजा थे। इन्होंने शत्रुओं का दमन करके बहुत समय तक राज्य किया। विद्वान् और धर्म के ज्ञाता होने के साथ-साथ ये अपनी प्रजा के हित में सदैव तत्पर रहते थे॥17॥ | ramayan सर्ग 1.51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजाऽऽसीदेष धर्मात्मा दीर्घकालमरिंदम:।
धर्मज्ञ: कृतविद्यश्च प्रजानां च हिते रत:॥ १७॥
अनुवाद
ये विश्वामित्र पहले धर्मात्मा राजा थे। इन्होंने शत्रुओं का दमन करके बहुत समय तक राज्य किया। विद्वान् और धर्म के ज्ञाता होने के साथ-साथ ये अपनी प्रजा के हित में सदैव तत्पर रहते थे॥17॥
‘This Vishwamitra was earlier a righteous king. He ruled for a long time by suppressing his enemies. Apart from being a scholar and a knower of religion, he was always ready to serve the interests of his subjects.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥