Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.5.20-22: जो अपने समूह से अलग होकर असहाय हो गए हैं, जिनका नेतृत्व या अनुसरण करने वाला कोई नहीं है (अर्थात जो पिता और पुत्र दोनों से ही रहित हैं), जो शब्दों को छेदने वाले बाणों से छेदे जा सकते हैं अथवा जो युद्ध में पराजित होकर भाग रहे हैं, जो ऐसे पुरुषों पर बाणों से आक्रमण नहीं करते, जिनके प्रशिक्षित हाथ शीघ्र ही लक्ष्य को भेदने में समर्थ हैं, जिन्होंने अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुणता प्राप्त कर ली है और जो वन में गरजते हुए उन्मत्त सिंहों, व्याघ्रों और सूअरों को तीक्ष्ण शस्त्रों से तथा अपनी भुजाओं के बल से भी मार डालने में समर्थ हैं, ऐसे हजारों पराक्रमी योद्धाओं से अयोध्यापुरी राजा दशरथ ने बसाई और उसका पालन-पोषण किया था। | ramayan सर्ग 1.5: राजा दशरथ द्वारा सुरक्षित अयोध्यापुरी का वर्णन । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये च बाणैर्न विध्यन्ति विविक्तमपरापरम्।
शब्दवेध्यं च विततं लघुहस्ता विशारदा:॥ २०॥
सिंहव्याघ्रवराहाणां मत्तानां नदतां वने।
हन्तारो निशितै: शस्त्रैर्बलाद् बाहुबलैरपि॥ २१॥
तादृशानां सहस्रैस्तामभिपूर्णां महारथै:।
पुरीमावासयामास राजा दशरथस्तदा॥ २२॥
अनुवाद
जो अपने समूह से अलग होकर असहाय हो गए हैं, जिनका नेतृत्व या अनुसरण करने वाला कोई नहीं है (अर्थात जो पिता और पुत्र दोनों से ही रहित हैं), जो शब्दों को छेदने वाले बाणों से छेदे जा सकते हैं अथवा जो युद्ध में पराजित होकर भाग रहे हैं, जो ऐसे पुरुषों पर बाणों से आक्रमण नहीं करते, जिनके प्रशिक्षित हाथ शीघ्र ही लक्ष्य को भेदने में समर्थ हैं, जिन्होंने अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुणता प्राप्त कर ली है और जो वन में गरजते हुए उन्मत्त सिंहों, व्याघ्रों और सूअरों को तीक्ष्ण शस्त्रों से तथा अपनी भुजाओं के बल से भी मार डालने में समर्थ हैं, ऐसे हजारों पराक्रमी योद्धाओं से अयोध्यापुरी राजा दशरथ ने बसाई और उसका पालन-पोषण किया था।
Ayodhyapuri was filled with thousands of mighty warriors like those who are helpless after being separated from their group, who have no one to lead or follow (i.e. who are devoid of both father and son), who can be pierced by arrows that pierce through the words or who are fleeing after being defeated in the war, those who do not attack such men with arrows, whose trained hands are capable of piercing the target quickly, who have acquired expertise in the use of weapons and who are capable of killing roaring mad lions, tigers and boars in the forest with sharp weapons and also with the strength of their arms. King Dasharath had settled and brought it up.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥