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श्लोक  1.49.16 
सा हि गौतमवाक्येन दुर्निरीक्ष्या बभूव ह।
त्रयाणामपि लोकानां यावद् रामस्य दर्शनम्।
शापस्यान्तमुपागम्य तेषां दर्शनमागता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गौतम के शाप के कारण तीनों लोकों में किसी भी प्राणी के लिए श्री रामचन्द्र को देखना कठिन था, किन्तु जब उन्होंने श्री राम को देखा तो उनका शाप समाप्त हो गया और वे सबके लिए दृश्यमान हो गए।
 
Due to Gautam's curse, it was difficult for any living being in the three worlds to see Shri Ramchandra before he could see him. When his curse ended after he saw Shri Ram, he became visible to all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)