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ramayan 1.49.10: रघुनन्दन! उसी समय से महात्मा गौतम की तपस्या के प्रभाव से इन्द्र को भेड़ के अण्डज धारण करने पड़े॥10॥   |   ramayan सर्ग 1.49: इन्द्र को भेड़े के अण्डकोष से युक्त करना,भगवान् श्रीराम के द्वारा अहल्या का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.49.10 
इन्द्रस्तु मेषवृषणस्तदाप्रभृति राघव।
गौतमस्य प्रभावेण तपसा च महात्मन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! उसी समय से महात्मा गौतम की तपस्या के प्रभाव से इन्द्र को भेड़ के अण्डज धारण करने पड़े॥10॥
 
Raghunandan! From that time onwards, due to the effect of Mahatma Gautam's penance, Indra had to wear the testicles of a sheep.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)