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ramayan 1.48.8: उन्होंने दशरथ के दोनों पराक्रमी पुत्रों का, जो परम आदरणीय अतिथि बनकर आये थे, यथोचित आतिथ्य किया ॥8॥   |   ramayan सर्ग 1.48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.48.8 
अतिथी परमं प्राप्तौ पुत्रौ दशरथस्य तौ।
पूजयामास विधिवत् सत्कारार्हौ महाबलौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने दशरथ के दोनों पराक्रमी पुत्रों का, जो परम आदरणीय अतिथि बनकर आये थे, यथोचित आतिथ्य किया ॥8॥
 
He extended due hospitality to the two mighty sons of Dasharatha who had come as most respected guests. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)