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अपनी दुष्ट पत्नी से ऐसा कहकर महाबली और तपस्वी गौतम ने यह आश्रम छोड़ दिया और सिद्धों तथा चारणों की सेवा में हिमालय की सुन्दर चोटी पर तपस्या करने लगे।
Having said this to his wicked wife, the mighty and ascetic Gautama left this hermitage and started performing tapasya on the beautiful peak of the Himalayas, served by the Siddhas and the Charanas.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डेऽष्टचत्वारिंश: सर्ग:॥ ४८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें अड़तालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥