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ramayan 1.48.25-26: 'उसे देखते ही देवराज इन्द्र भय से काँप उठे। उनका मुख विषाद से भर गया। दुष्ट इन्द्र को मुनि वेश में देखकर धर्मात्मा गौतम मुनि ने क्रोधपूर्वक कहा-॥25-26॥   |   ramayan सर्ग 1.48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  1.48.25-26 
दृष्ट्वा सुरपतिस्त्रस्तो विषण्णवदनोऽभवत्॥ २५॥
अथ दृष्ट्वा सहस्राक्षं मुनिवेषधरं मुनि:।
दुर्वृत्तं वृत्तसम्पन्नो रोषाद् वचनमब्रवीत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'उसे देखते ही देवराज इन्द्र भय से काँप उठे। उनका मुख विषाद से भर गया। दुष्ट इन्द्र को मुनि वेश में देखकर धर्मात्मा गौतम मुनि ने क्रोधपूर्वक कहा-॥25-26॥
 
‘As soon as he saw him, Devraj Indra trembled with fear. His face was filled with sadness. Seeing the wicked Indra in the guise of a sage, the virtuous sage Gautama said in anger -॥ 25-26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)