तस्यान्तरं विदित्वा च सहस्राक्ष: शचीपति:।
मुनिवेषधरो भूत्वा अहल्यामिदमब्रवीत्॥ १७॥
अनुवाद
एक दिन जब महर्षि गौतम आश्रम पर नहीं थे, तब शचीपति इन्द्र ने उपयुक्त अवसर समझकर ऋषि का वेश धारण करके वहाँ आकर अहिल्या से इस प्रकार कहा -॥17॥
‘One day, when Maharishi Gautam was not at the hermitage, Sachipati Indra considered it a suitable opportunity and came there disguised as a sage and spoke to Ahalya as follows -॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥