हन्त ते कथयिष्यामि शृणु तत्त्वेन राघव।
यस्यैतदाश्रमपदं शप्तं कोपान्महात्मन:॥ १४॥
अनुवाद
रघुनन्दन! पूर्वकाल में जिस महात्मा का यह आश्रम था और जिसने क्रोध करके इसे शाप दिया था, उसका सम्पूर्ण वृत्तान्त तथा इस आश्रम के विषय में मैं तुमसे कहता हूँ। इसे पूरा सुनो॥14॥
Raghunandan! I am telling you the entire story of the great soul whose hermitage this was in the past and who cursed it in anger and about this hermitage. Listen to it in its entirety.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥