इदमाश्रमसंकाशं किं न्विदं मुनिवर्जितम्।
श्रोतुमिच्छामि भगवन् कस्यायं पूर्व आश्रम:॥ १२॥
अनुवाद
‘प्रभो! यह कैसा स्थान है, जो आश्रम जैसा दिखता है; परन्तु यहाँ एक भी ऋषि दिखाई नहीं देता। मैं सुनना चाहता हूँ कि पहले यह किसका आश्रम था?’॥12॥
‘Lord! What kind of a place is this, which looks like an ashram; but not even a single sage is visible here. I want to hear whose ashram this was earlier?’॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥