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ramayan 1.47.18: महाराज इक्ष्वाकु की कृपा से विशाला के सभी राजा दीर्घायु, महान, पराक्रमी और अत्यंत धार्मिक हो गए हैं ॥18॥   |   ramayan सर्ग 1.47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.47.18 
इक्ष्वाकोस्तु प्रसादेन सर्वे वैशालिका नृपा:।
दीर्घायुषो महात्मानो वीर्यवन्त: सुधार्मिका:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महाराज इक्ष्वाकु की कृपा से विशाला के सभी राजा दीर्घायु, महान, पराक्रमी और अत्यंत धार्मिक हो गए हैं ॥18॥
 
By the grace of Maharaja Ikshvaku, all the kings of Vishala have become long-living, great, powerful and extremely religious. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)