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ramayan 1.47.14: श्रीरामचन्द्र! सुचंद्र के पुत्र धूम्रश्व थे और धूम्रश्व के पुत्र सृंजय थे। 14॥   |   ramayan सर्ग 1.47: दिति का अपने पुत्रों को मरुद्गण बनाकर देवलोक में रखने के लिये इन्द्र से अनुरोध, इक्ष्वाकु-पुत्र विशाल द्वारा विशाला नगरी का निर्माण   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.47.14 
सुचन्द्रतनयो राम धूम्राश्व इति विश्रुत:।
धूम्राश्वतनयश्चापि सृञ्जय: समपद्यत॥ १४॥
 
 
अनुवाद
श्रीरामचन्द्र! सुचंद्र के पुत्र धूम्रश्व थे और धूम्रश्व के पुत्र सृंजय थे। 14॥
 
Shriramchandra! Suchandra's son was Dhumrashwa and Dhumrashwa's son was Srinjay. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)