श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.46.9 
तपस्तस्यां हि कुर्वत्यां परिचर्यां चकार ह।
सहस्राक्षो नरश्रेष्ठ परया गुणसम्पदा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पुरुषप्रवर श्री राम! जब दिति तपस्या कर रही थी, तब सहस्रलोचन इन्द्र विनय आदि सद्गुणों से युक्त होकर उसकी सेवा करने लगे॥9॥
 
Purushapravara Shri Ram! While Diti was performing penance, Sahasralochan Indra became full of good qualities like humility and started serving her. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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