श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.46.7 
एवमुक्त्वा महातेजा: पाणिना सम्ममार्ज ताम्।
तामालभ्य तत: स्वस्ति इत्युक्त्वा तपसे ययौ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर महाबली कश्यप ने दिति के शरीर पर हाथ फेरा और कहा, ‘तुम्हारा कल्याण हो।’ यह कहकर वे तपस्या के लिए चले गए।
 
Saying this, the mighty Kashyap stroked Diti's body. Then he touched her and said, 'May you be blessed.' Saying this, he left for penance.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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