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श्लोक 1.46.4  |
तस्यास्तद् वचनं श्रुत्वा मारीच: कश्यपस्तदा।
प्रत्युवाच महातेजा दितिं परमदु:खिताम्॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| उसके वचन सुनकर महाबली मरीचण्डनन्दन कश्यप ने उस अत्यन्त दुःखी दिति को इस प्रकार उत्तर दिया:॥4॥ |
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| On hearing her words the mighty Marichandanandan Kasyapa replied to that extremely distressed Diti in the following manner:॥ 4॥ |
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