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ramayan 1.46.4: उसके वचन सुनकर महाबली मरीचण्डनन्दन कश्यप ने उस अत्यन्त दुःखी दिति को इस प्रकार उत्तर दिया:॥4॥   |   ramayan सर्ग 1.46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.46.4 
तस्यास्तद् वचनं श्रुत्वा मारीच: कश्यपस्तदा।
प्रत्युवाच महातेजा दितिं परमदु:खिताम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उसके वचन सुनकर महाबली मरीचण्डनन्दन कश्यप ने उस अत्यन्त दुःखी दिति को इस प्रकार उत्तर दिया:॥4॥
 
On hearing her words the mighty Marichandanandan Kasyapa replied to that extremely distressed Diti in the following manner:॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)