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ramayan 1.46.21: उस समय दिति ने कहा, "इंद्र! बालक को मत मारो, उसे मत मारो।" माता के वचनों पर गर्व करते हुए इंद्र सहसा गर्भ से बाहर आ गए।   |   ramayan सर्ग 1.46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.46.21 
न हन्तव्यं न हन्तव्यमित्येव दितिरब्रवीत्।
निष्पपात तत: शक्रो मातुर्वचनगौरवात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस समय दिति ने कहा, "इंद्र! बालक को मत मारो, उसे मत मारो।" माता के वचनों पर गर्व करते हुए इंद्र सहसा गर्भ से बाहर आ गए।
 
At that time Diti said, "Indra! Do not kill the child, do not kill him." Taking pride in the mother's words, Indra suddenly came out of the womb.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)