श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.46.20 
मा रुदो मा रुदश्चेति गर्भं शक्रोऽभ्यभाषत।
बिभेद च महातेजा रुदन्तमपि वासव:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र ने रोते हुए गर्भस्थ शिशु से कहा - 'भैया! मत रो, मत रो' किन्तु गर्भस्थ शिशु रोता रहा, फिर भी महाबली इन्द्र ने उसे टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
Then Indra said to the crying fetus - 'Brother! Don't cry, don't cry' but even though the fetus kept crying, the mighty Indra tore it into pieces.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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