vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 1: बाल काण्ड
»
सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना
»
श्लोक 20
श्लोक
1.46.20
मा रुदो मा रुदश्चेति गर्भं शक्रोऽभ्यभाषत।
बिभेद च महातेजा रुदन्तमपि वासव:॥ २०॥
अनुवाद
तब इन्द्र ने रोते हुए गर्भस्थ शिशु से कहा - 'भैया! मत रो, मत रो' किन्तु गर्भस्थ शिशु रोता रहा, फिर भी महाबली इन्द्र ने उसे टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
Then Indra said to the crying fetus - 'Brother! Don't cry, don't cry' but even though the fetus kept crying, the mighty Indra tore it into pieces.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas