श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.46.19 
भिद्यमानस्ततो गर्भो वज्रेण शतपर्वणा।
रुरोद सुस्वरं राम ततो दितिरबुध्यत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब श्री राम गर्भ में स्थित बालक को सौ अंगों वाले वज्र से छेद रहे थे, तब बालक जोर-जोर से रोने लगा। इससे दितिकी की नींद खुल गई और वह उठ बैठी॥19॥
 
When Shri Ram was piercing the child in the womb with the thunderbolt of hundred parts, the child started crying loudly. This woke Ditiki up and she sat up.॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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