श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.46.18 
तस्या: शरीरविवरं प्रविवेश पुरंदर:।
गर्भं च सप्तधा राम चिच्छेद परमात्मवान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राम! तब सदा जागने वाले इन्द्र ने माता दिति के गर्भ में प्रवेश करके गर्भस्थ शिशु को सात भागों में तोड़ डाला॥18॥
 
Sri Rama! Then the ever-vigilant Indra entered the womb of mother Diti and broke the foetus therein into seven parts.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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