Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.46.16: ऐसा कहकर दिति निद्रा से जाग उठीं। उस समय सूर्यदेव आकाश के मध्य में पहुँच चुके थे - मध्याह्न का समय था। देवी दिति चटाई पर बैठकर झपकी लेने लगीं। उनका सिर नीचे झुक गया और उनके केश उनके चरणों से स्पर्श करने लगे। इस प्रकार सोते-सोते उन्होंने अपने चरणों को अपने सिर से स्पर्श कर लिया॥16॥ | ramayan सर्ग 1.46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्त्वा च दितिस्तत्र प्राप्ते मध्यं दिनेश्वरे।
निद्रयापहृता देवी पादौ कृत्वाथ शीर्षत:॥ १६॥
अनुवाद
ऐसा कहकर दिति निद्रा से जाग उठीं। उस समय सूर्यदेव आकाश के मध्य में पहुँच चुके थे - मध्याह्न का समय था। देवी दिति चटाई पर बैठकर झपकी लेने लगीं। उनका सिर नीचे झुक गया और उनके केश उनके चरणों से स्पर्श करने लगे। इस प्रकार सोते-सोते उन्होंने अपने चरणों को अपने सिर से स्पर्श कर लिया॥16॥
Having said this, Diti woke up from her sleep. At that time the Sun God had reached the middle of the sky - it was afternoon. Goddess Diti started taking a nap while sitting on the mat. Her head bent down and her hair touched her feet. In this way, while sleeping, she touched her feet to her head.॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥