श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.46.15 
याचितेन सुरश्रेष्ठ पित्रा तव महात्मना।
वरो वर्षसहस्रान्ते मम दत्त: सुतं प्रति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे देवश्रेष्ठ! मेरी प्रार्थना से आपके पितामह ने मुझे एक हजार वर्ष के बाद पुत्र प्रदान किया है। ॥15॥
 
'O best of the gods! Upon my prayers, your great father has blessed me with a son after a thousand years.' ॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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