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ramayan 1.46.13: हे बलवानों में श्रेष्ठ! अब मेरी तपस्या के केवल दस वर्ष शेष हैं। तुम्हारा कल्याण हो। दस वर्ष पश्चात् तुम अपने भावी भाई को देख सकोगे॥13॥   |   ramayan सर्ग 1.46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.46.13 
तपश्चरन्त्या वर्षाणि दश वीर्यवतां वर।
अवशिष्टानि भद्रं ते भ्रातरं द्रक्ष्यसे तत:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे बलवानों में श्रेष्ठ! अब मेरी तपस्या के केवल दस वर्ष शेष हैं। तुम्हारा कल्याण हो। दस वर्ष पश्चात् तुम अपने भावी भाई को देख सकोगे॥13॥
 
'O bravest of the strong! Now only ten more years of my penance are remaining. May you be blessed. After ten years you will be able to see your future brother.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)