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ramayan 1.46.12: रघुनन्दन! जब सहस्र वर्ष पूरे होने में कुल दस वर्ष शेष रह गए, तब एक दिन दिति ने बड़े हर्ष से भरकर सहस्रलोचन इन्द्र से कहा - ॥12॥   |   ramayan सर्ग 1.46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 46: दिति का कश्यपजी से इन्द्र हन्ता पुत्र की प्राप्ति के लिये कुशप्लव में तप, इन्द्र का उनके गर्भ के सात टुकड़े कर डालना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.46.12 
पूर्णे वर्षसहस्रे सा दशोने रघुनन्दन।
दिति: परमसंहृष्टा सहस्राक्षमथाब्रवीत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! जब सहस्र वर्ष पूरे होने में कुल दस वर्ष शेष रह गए, तब एक दिन दिति ने बड़े हर्ष से भरकर सहस्रलोचन इन्द्र से कहा - ॥12॥
 
Raghunandan! When a total of ten years were left for the completion of the thousand years, then one day Ditti, filled with great joy, said to Sahasralochan Indra - ॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)