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ramayan 1.45.9: तत्पश्चात् वे स्वयं उत्तर तट पर पहुँचे और वहाँ रहने वाले ऋषियों का स्वागत किया। फिर सब लोग गंगाजी के तट पर रुककर विशाला नामक नगरी की शोभा निहारने लगे॥9॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.45.9 
उत्तरं तीरमासाद्य सम्पूज्यर्षिगणं तत:।
गंगाकूले निविष्टास्ते विशालां ददृशु: पुरीम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे स्वयं उत्तर तट पर पहुँचे और वहाँ रहने वाले ऋषियों का स्वागत किया। फिर सब लोग गंगाजी के तट पर रुककर विशाला नामक नगरी की शोभा निहारने लगे॥9॥
 
Thereafter he himself reached the northern bank and welcomed the sages living there. Then everyone stopped on the bank of river Ganga and started admiring the beauty of the city called Vishala.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)