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ramayan 1.45.8: महात्मा रघुनन्दन के ये वचन सुनकर विश्वामित्र ने सबसे पहले ऋषियों के साथ राम और लक्ष्मण को नदी पार कराने में सहायता की।   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.45.8 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राघवस्य महात्मन:।
संतारं कारयामास सर्षिसङ्घस्य कौशिक:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महात्मा रघुनन्दन के ये वचन सुनकर विश्वामित्र ने सबसे पहले ऋषियों के साथ राम और लक्ष्मण को नदी पार कराने में सहायता की।
 
On hearing these words of Mahatma Raghunandan, Visvamitra first helped Rama and Lakshmana cross the river along with the sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)