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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.45.5 
तत: प्रभाते विमले विश्वामित्रं तपोधनम्।
उवाच राघवो वाक्यं कृताह्निकमरिंदम:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर, निर्मल प्रातःकाल के समय जब तपोधन विश्वामित्र जी नित्यकर्म से निवृत्त हो चुके थे, तब शत्रुदमन श्री रामचन्द्र जी उनके पास गए और बोले-॥5॥
 
Thereafter, in the presence of clear morning, when Tapodhan Vishwamitra ji had retired from his daily routine, then Shatrudaman Shri Ramchandra ji went to him and said – ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)