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ramayan 1.45.4: 'विश्वामित्र! मैंने सारी रात लक्ष्मण के साथ इस शुभ कथा का चिंतन करते हुए बिताई है।'   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.45.4 
तस्य सा शर्वरी सर्वा मम सौमित्रिणा सह।
जगाम चिन्तयानस्य विश्वामित्र कथां शुभाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'विश्वामित्र! मैंने सारी रात लक्ष्मण के साथ इस शुभ कथा का चिंतन करते हुए बिताई है।'
 
'Visvamitra! I have spent the whole night thinking about this auspicious story with Lakshmana.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)