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ramayan 1.45.29-30h: यह सुनकर भगवान हृषिकेश ने कच्छप का रूप धारण कर लिया, पर्वत को अपनी पीठ पर रख लिया और वहीं समुद्र में सो गए।   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  1.45.29-30h 
इति श्रुत्वा हृषीकेश: कामठं रूपमास्थित:॥ २९॥
पर्वतं पृष्ठत: कृत्वा शिश्ये तत्रोदधौ हरि:।
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भगवान हृषिकेश ने कच्छप का रूप धारण कर लिया, पर्वत को अपनी पीठ पर रख लिया और वहीं समुद्र में सो गए।
 
On hearing this, Lord Hrishikesh assumed the form of a tortoise, placed the mountain on his back and went to sleep there in the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)