Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.45.25-26: 'ऐसा कहकर भगवान विष्णु वहाँ अन्तर्धान हो गए। देवताओं का भय देखकर और देवाधिदेव भगवान विष्णु के उपर्युक्त वचन सुनकर भगवान रुद्र ने उस भयंकर विष को अमृत के समान समझकर उसे अपने कंठ में धारण कर लिया और देवताओं को विदा करके वे अपने धाम को चले गए॥25-26॥ | ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'ऐसा कहकर भगवान विष्णु वहाँ अन्तर्धान हो गए। देवताओं का भय देखकर और देवाधिदेव भगवान विष्णु के उपर्युक्त वचन सुनकर भगवान रुद्र ने उस भयंकर विष को अमृत के समान समझकर उसे अपने कंठ में धारण कर लिया और देवताओं को विदा करके वे अपने धाम को चले गए॥25-26॥
'Having said this, Lord Vishnu disappeared there. Seeing the fear of the gods and hearing the above words of Lord Vishnu, the God of Gods, Lord Rudra considered that terrible poison like nectar and took it in his throat and after bidding farewell to the gods, he went to his place. 25-26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥