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ramayan 1.45.22: देवताओं की यह पुकार सुनकर भगवान शिव वहाँ प्रकट हुए। तत्पश्चात शंख और चक्र धारण करने वाले भगवान श्रीहरि भी वहाँ प्रकट हुए॥22॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.45.22 
एवमुक्तस्ततो देवैर्देवदेवेश्वर: प्रभु:।
प्रादुरासीत् ततोऽत्रैव शङ्खचक्रधरो हरि:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
देवताओं की यह पुकार सुनकर भगवान शिव वहाँ प्रकट हुए। तत्पश्चात शंख और चक्र धारण करने वाले भगवान श्रीहरि भी वहाँ प्रकट हुए॥22॥
 
'On hearing this call from the gods, Lord Shiva appeared there. Then Lord Shri Hari, wielding the conch and discus, also appeared there. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)